जब टीसी ने पूर्व विधायक पब्बर राम से क्षमा माँगते हुए कहा...

आप ऐसे होंगे मैंने सोचा भी नहीं था
ए.के. मिश्रा
महान साम्यवादी नेता, क्रांतिकारी आजीवन सर्वहारा समाज की स्थापना के लिए प्रयत्नशील रहे (पब्बर चाचा) कॉमरेड पब्बर राम की 24 मार्च को 19 वीं पुण्यतिथि थी. 1911 में गाजीपुर जिले के एक निम्नवर्गीय परिवार में जन्मे पब्बर राम 1929 में महात्मा गांधी के आशीर्वचन से स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय हुए और 1932 में संयुक प्रांत के कुख्यात गवर्नर मैलकम हेली को गाजीपुर में काला झंडा दिखाने के बाद धूमकेतु के रूप में सामने आए. तब से लेकर 2005 तक वे प्रासंगिक रहे. उनका क्रांतिकारी आंदोलन में सबसे बड़ा अवदान अंकुसपुर – नंदगंज राजनीतिक ट्रेन डकैती 1941 के सूत्रधार के रूप में रहा. यह एक ऐसी ट्रेन डकैती थी जिसके बारे में गाजीपुर जिला प्रशासन पहले से ही अवगत था लेकिन इस कांड को रोक नहीं पाया. इतना ही नहीं इस कांड में शामिल अधिकांश क्रांतिकारियों के नाम भी शासन को मालूम थे. इतना होने के बाद भी शासन को न्यायालय में अभियोग पत्र दाखिल करने में लगभग डेढ़ साल का समय लग गया किन्तु शासन न तो इस डकैती के उद्देश्यों को बता पाया, न लूटी गई धन राशि बरामद कर पाया और न ही इस कांड में उपयोग में लाए गए हथियार ही बरामद हो पाए. इस डकैती के हथियारों का उपयोग क्रांतिकारियों ने 1942 में गोरखपुर जिले के सहजनवा में पड़ी ट्रेन डकैती में किया.
कालांतर में वे स्वाधीन भारत में गाजीपुर नगरपालिका के पहले निर्वाचित अध्यक्ष होने के साथ ही साथ गाजीपुर विधानसभा सीट से दो बार कम्युनिस्ट पार्टी से विधायक तथा अखिल भारतीय किसान सभा के उपाध्यक्ष भी निर्वाचित हुए थे. मेरे शोध प्रबंध – *पूर्वांचल उत्तर प्रदेश में क्रांतिकारी आंदोलन (1930-1942)* में उन्होंने विशेष रुचि लेते हुए पूर्वांचल में घटित लगभग सभी क्रांतिकारी घटनाओं को उन्होंने मौखिक रूप से मुझे बताया था जिससे मुझे शोध प्रबंध पूर्ण करने में आसानी हो गई और मेरा संदर्भित विषय पर देश का पहला शोध प्रबंध है.
उनके साथ मैं अनेकों बार विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों में भाग लिया .जिसके अनेकों संस्मरण आज मेरे मस्तिस्क पटल तैर रहे हैं जिसमें से केवल एक घटना का उल्लेख करना चाहूंगा जो उनकी सादगी का उदाहरण है. हुआ यह था कि 2004 में हम लोग मऊ से लिच्छवी एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे थे. मऊ स्टेशन पर जब हम लोग ए सी द्वितीय श्रेणी के डिब्बे सवार होने की कोशिश कर रहे थे तो टी सी हम लोगों को कोच के अंदर जाने से रोकने लगा इसपर उन्होंने जब टी सी को बर्थ नंबर बताया तो टी सी ने कहा कि यह बर्थ स्वाधीनता सेनानी पब्बर राम की है इसपर उन्होंने हंस कर कहा कि मैं पब्बर राम हूं. आश्चर्यचकित टी सी ने सम्मान पूर्वक हम लोगों को बर्थ ले जाकर उनसे क्षमा मांगते हुए कहा कि मैने आपका नाम तो अनेकों बार सुना था लेकिन आप ऐसे होंगे मैंने सोचा भी नहीं था. वह टी सी इलाहाबाद तक हम लोगों के साथ गया और जी भर कर उनसे बातें किया। 24 मार्च को ऐसे महापुरुष की पुण्य तिथि पर उन्हें अश्रुपूरित नमन करता हूं।