चंद्रचूड़ से भी निचले स्तर तक पद की गरिमा गिरा चुके हैं सूर्यकांत- शाहनवाज़ आलम

साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 247 वीं कड़ी में बोले कांग्रेस नेता

नयी दिल्ली, 17 मई 2026. आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ताओं को तेलचट्टा और परजीवी कहकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने पद की गरिमा को बहुत निचले स्तर तक गिरा दिया है. इस मामले में वह अब पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ से काफी आगे निकल चुके हैं. उन्हें न्यायपालिका की इज़्ज़त रखने के लिए अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

ये बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 247 वीं कड़ी में कहीं.

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत की भाषा कम पढ़े लिखे आरएसएस के आईटी सेल से प्रभावित युवाओं के स्तर की हो गई है जो सरकार से सवाल पूछने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, आंदोलनकारियों, मीडिया एक्टिविस्टों और आरटीआई कार्यकर्ताओं को अर्बन नक्सल और परजीवी बताते रहे हैं. लेकिन यह मानने के बहुत से आधार हैं कि सीजेआई यह सब ख़ुद से नहीं बोल रहे हैं बल्कि उन्हें सरकार की तरफ़ से ऐसे नैरेटिव को वैधता देने के काम पर लगाया गया है. इससे पहले अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़े एक मुस्लिम व्यक्ति के मामले में भी उनका रुख़ मौलिक अधिकारों की भावना के ख़िलाफ़ था. जबकि मध्य प्रदेश के एक मंत्री द्वारा मुस्लिम सैन्य अधिकारी के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक टिप्पणी के अति गंभीर मामले में उनका रुख़ आरोपी को बचाने वाला था.

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस देश के युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकार से सवाल पूछने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट और ख़ुद सूर्यकांत जी में कौन परजीवी है यह इस तथ्य से स्पष्ट हो जाता है कि 2019 में कारवाँ पत्रिका में प्रकाशित एक विस्तृत रिपोर्ट में उनके ऊपर हाईकोर्ट का जज रहते हुए टैक्स चुराने, घूस लेकर ज़मानत देने, विवादित संपत्तियों के समझौते में दलाली करने के आरोप विभिन्न व्यक्तियों द्वारा लगाए गए थे. इसके अलावा रीयल स्टेट कारोबारी सतीश कुमार जैन ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एच एस कपाड़िया को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सूर्यकांत संपत्तियों की क़ीमत कम दिखाकर कैश में पैसों के लेनदेन का भी काम करते हैं. जिससे एक मामले में उन्होंने 7 करोड़ 63 लाख की स्टांप ड्यूटी की चोरी की थी.

वहीं पंजाब की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद एक क़ैदी ने भी सूर्यकांत पर एनडीपीएस के आठ मामलों में घूस लेकर ज़मानत देने का खुलासा किया था. उसने सूर्यकांत के भाई, भतीजे और दो अन्य वकीलों पर उनकी तरफ से दलाली करने का आरोप लगाया था. इन आरोपों का आजतक निस्तारण नहीं हुआ है.

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि हिमांचल हाईकोर्ट में जस्टिस एके मित्तल सूर्यकांत से 4 साल सीनियर थे. लेकिन बावजूद इसके सूर्यकांत को हिमांचल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायधीश नियुक्त कर दिया गया था. जिसपर सुप्रीम कोर्ट के जज आदर्श गोयल ने सार्वजनिक तौर पर आपत्ति दर्ज करते हुए एके मित्तल को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की मांग की थी.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि सरकार से सवाल पूछने वाले प्रतिष्ठित वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं या आरटीआई कार्यकर्ताओं पर ऐसे आरोप नहीं लगे हैं जैसे सूर्यकांत जी पर लगे हैं. इन आरोपों के बावजूद अगर उन्हें सीजेआई बनाया गया है तो यह किसी के भी समझ में आ सकता है कि उन्हें यह पद किस संगठन का परजीवी होने के कारण मिला होगा.



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