अमेरिका में अडानी समूह को बड़ी राहत, मुकदमे वापस लेने की तैयारी: रिपोर्ट

भारत के प्रमुख उद्योगपति Gautam Adani और उनके समूह के लिए अमेरिका से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी [Reuters](https://www.reuters.com?utm_source=chatgpt.com) की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी न्याय विभाग अडानी समूह से जुड़े कथित धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी मामलों को वापस लेने पर विचार कर रहा है। इस खबर के सामने आने के बाद कारोबारी जगत और भारतीय शेयर बाजार में भी हलचल तेज हो गई है।

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी एजेंसियां पिछले कुछ महीनों से मामले की समीक्षा कर रही थीं। जांच के दौरान कई कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर दोबारा विचार किया गया, जिसके बाद यह संकेत मिले हैं कि मुकदमों को आगे बढ़ाने की संभावना कमजोर पड़ रही है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई औपचारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्षों में अडानी समूह पर विदेशी निवेश, कारोबारी पारदर्शिता और वित्तीय लेन-देन को लेकर कई सवाल उठे थे। अमेरिकी संस्थाओं द्वारा की जा रही जांच के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की नजर भी इस मामले पर बनी हुई थी। ऐसे में यदि मुकदमे वापस लिए जाते हैं तो इसे अडानी समूह के लिए बड़ी कानूनी और कारोबारी जीत माना जाएगा।

इस खबर के बाद भारतीय बाजार में अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में सकारात्मक असर देखने को मिला। निवेशकों ने इसे समूह की साख मजबूत होने के संकेत के रूप में देखा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कानूनी विवाद कम होने से समूह को वैश्विक निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। विपक्ष लंबे समय से अडानी समूह को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाता रहा है, जबकि सरकार और भाजपा लगातार यह कहती रही है कि उद्योग और निवेश को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। अब अमेरिकी रिपोर्ट आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतिम फैसला आने तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा सकती, लेकिन यदि अमेरिकी न्याय विभाग आधिकारिक रूप से मुकदमे वापस लेता है तो यह अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जगत में बड़ा संदेश होगा। इससे भारतीय कंपनियों के प्रति विदेशी निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है।
फिलहाल देश और दुनिया की निगाहें अमेरिकी प्रशासन के अगले आधिकारिक कदम पर टिकी हुई हैं।



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