अगर मोहम्मद दीपक पर हमला हुआ तो जस्टिस राकेश थपलियाल होंगे ज़िम्मेदार- शाहनवाज़ आलम

राकेश थपलियाल जैसे जजों की टिप्पणियों से बजरंग दल के गुंडों का बढ़ता है मनोबल, सुप्रीम कोर्ट करे उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई
नयी दिल्ली, 23 मार्च 2026. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने कहा है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा दीपक कुमार और विजय रावत की पुलिस सुरक्षा की मांग को जांच को प्रभावित करने का प्रयास बताकर ख़ारिज कर दिया जाना भाजपा और आरएसएस के दबाव में दिया गया फ़ैसला है. ऐसी स्थिति में अगर दीपक कुमार और उनके साथी विजय रावत के साथ कोई हिंसक घटना होती है तो इसके लिए ऐसा फैसला देने वाले जज जस्टिस राकेश थपलियाल ही ज़िम्मेदार होंगे.
शाहनवाज़ आलम ने जारी बयान में कहा कि दीपक और विजय रावत ने अपनी याचिका में पुलिस पर हमलावरों के वीडियो और व्यक्तिगत पहचान के सारे तथ्य होने के बावजूद किसी भी हमलावर को अभी तक गिरफ्तार न करने का आरोप लगाया था. ऐसी स्थिति में याचिका पर सुनवाई करते हुए जज को पुलिस से पूछना चाहिए था कि सारे सुबूत होने के बावजूद अभी तक हमलावर गिरफ़्तार क्यों नहीं किए गए. लेकिन यहाँ जज राकेश थपलियाल ने उल्टे पीड़ित व्यक्ति की ही सुरक्षा की मांग को जाँच को प्रभावित करने की साज़िश बता दिया. जो अपने आप में किसी हाईकोर्ट जज का सरकार के दबाव में काम करने का अनूठा उदाहरण है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि पूरे देश ने देखा कि किस तरह बजरंग दल के गुंडे पहले से ऐलान करके पुलिस की मौजूदगी में 31 जनवरी को दीपक कुमार के घर के बाहर उन्हें मारने की धमकी देते हुए इकट्ठा हुए थे. ऐसे में हाईकोर्ट के जज राकेश थपलियाल का यह कहना कि दीपक सुरक्षा की मांग करके जांच एजेंसियों पर दबाव बनाकर पुलिस द्वारा अपने ख़िलाफ़ दायर एफ़आईआर को ख़त्म कराना चाहता है, उनके न्यायिक विवेक पर गंभीर सवाल उठाता है.
उन्होंने कहा कि जज का यह तर्क भी उनके न्यायिक विवेक पर गंभीर सवाल उठाता है कि ‘घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने उन्हें हाथ नहीं लगाया’ इसलिए उनकी सुरक्षा का डर निराधार है.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज की यह टिप्पणी बजरंग दल के गुंडों का मनोबल बढ़ाने वाली है. इससे उन्हें यही संदेश गया है कि वे किसी को भी मारने की धमकी देकर भी राकेश थपलियाल जैसे जजों द्वारा बचा लिए जायेंगे. इस तरह यह फैसला अपराधियों और अपराधियों को संरक्षण देने वाले जज के मिलीभगत का भी अनूठा उदाहरण बन गया है.
कांग्रस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हेटस्पीच रोकने के लिए राज्यों को जो गाइडलाइन जारी किया था उसकी अवमानना उत्तराखंड की भाजपा सरकार लगातार करती आ रही है. लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट और ना ही उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अब तक राज्य सरकार को अवमानना नोटिस दिया है. ऐसे में राकेश थपलियाल जैसे जजों का हेट स्पीच करने वालों का मनोबल बढ़ाने वाला निर्देश देना प्रदेश में क़ानून व्यवस्था की समस्या को और बढ़ा देगा. इसलिए राकेश थपलियाल के इस टिप्पणी पर ख़ुद सुप्रीम कोर्ट को संज्ञान लेकर उनके ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करनी चाहिए.



