हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद संभल के एसपी और डीएम को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए- शाहनवाज़ आलम

साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम की 238 वीं कड़ी में बोले कांग्रेस नेता
लखनऊ, 15 मार्च 2026. इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी के बाद संभल के एसपी और डीएम को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए. अगर न्यायपालिका अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करे तो सांप्रदायिकता फैलाने वाले प्रशासनिक अधिकारी दुरुस्त हो जाएंगे.
ये बातें कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने साप्ताहिक स्पीक अप कार्यक्रम में 238 वीं कड़ी में कहीं.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार संभल को सांप्रदायिक प्रयोगशाला बनाना चाहती है. इसीलिए उसने ऐसे अधिकारियों को तैनात किया है जिनकी प्रतिबद्धता संविधान के बजाए आरएसएस के प्रति है. इस रणनीति के तहत ही उसने पहले अनुज चौधरी को भेजा था. जिन पर कोर्ट द्वारा एफ़आईआर दर्ज करने के आदेश के बावजूद उसे बचाने में लगी है. अब उसकी जगह कुलदीप कुमार को भेजा है. जो खुलेआम मुसलमानों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने पर जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं.
कांग्रेस नेता ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की यह सख़्त टिप्पणी कि संभल एसपी और डीएम किसी भी इबादतगाह में लोगों की संख्या निर्धारित नहीं कर सकते और अगर वो क़ानून व्यवस्था संभाल पाने में सक्षम नहीं हैं तो उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए, सांप्रदायिक मानसिकता के अधिकारियों के लिए सबक होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी बरेली के एसपी और डीएम को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नागरिकों के धार्मिक अधिकारों को बाधित करने पर नोटिस देकर कोर्ट में मौजूद होकर अपनी संविधान विरोधी कार्यवायी पर अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थि होने का निर्देश दिया है. कोर्ट का यह भी निर्देश है कि अगर वो कोर्ट में पेश नहीं होते हैं तो उनके ख़िलाफ़ ग़ैर जमानती वारंट जारी कर दिया जाएगा.
शाहनवाज़ आलम ने कहा कि यह योगी सरकार के लिए व्यक्तिगत तौर पर शर्मिंदा होने का अवसर है. क्योंकि ये अधिकारी उनकी मुस्लिम विरोधी मानसिकता को ही अमल में ला रहे थे. ऐसी स्थिति में अगर बरेली के एसपी और डीएम कोर्ट में पेश नहीं होते हैं तो कोर्ट उन्हें भगोड़ा भी घोषित कर सकता है. जिसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही ज़िम्मेदार होंगे.



