"मखाना बिहार में सामाजिक-आर्थिक प्रभाव” सांगोष्ठी का हुआ आयोजन

“सुरम्या: ऐन इक्विटेबल एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट फोरम” ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सतत शिक्षा एवं विस्तार विभाग (DCEE) के सहयोग से 18 जुलाई 2025 को “मखाना, PACS और स्थिरता: बिहार में सामाजिक-आर्थिक प्रभाव” विषयक एक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम कक्ष संख्या 27, सेमिनार हॉल, DCEE, दिल्ली विश्वविद्यालय में संपन्न हुआ।

इस संगोष्ठी का उद्देश्य मखाना (Foxnut) उत्पादन क्षेत्र तथा प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की भूमिका को सतत कृषि के संदर्भ में विश्लेषित करना तथा बिहार में इनकी सामाजिक-आर्थिक प्रासंगिकता और संभावनाओं को रेखांकित करना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. प्रकाश नारायण (निदेशक) के स्वागत वक्तव्य से हुआ, जिसमें उन्होंने मखाना उत्पादन से संबंधित नीतिगत हस्तक्षेपों की अनिवार्यता को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि के स्वागत उपरांत उन्होंने मिथिला एवं बिहार की क्षेत्रीय विशिष्टताओं पर प्रकाश डालते हुए मखाना उत्पादन क्षेत्र के गठन तथा पृथक बजटीय प्रावधान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ऐसे प्रयास न केवल स्थानीय कृषि को सशक्त करेंगे, अपितु मिथिला की समृद्धि के माध्यम से बिहार की संपूर्ण अर्थव्यवस्था को भी एक नया आयाम देंगे।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के संयुक्त सचिव डॉ. के. के. त्रिपाठी ने कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई तथा मखाना उत्पादन की आर्थिक उपयोगिता, PACS के सहकारी ढाँचे और इनके दीर्घकालिक लाभों पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण आय वृद्धि, आजीविका सृजन तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) में हिस्सेदारी बढ़ाने में इनकी भूमिका को रेखांकित किया। <|br>
कार्यक्रम का समापन प्रो. कुमार आशुतोष (प्रमुख, DCEE, दिल्ली विश्वविद्यालय) द्वारा हुआ। उन्होंने सतत विकास के विमर्शों को दिशा देने में विश्वविद्यालयों की बौद्धिक और नैतिक भूमिका को प्रतिपादित किया, विशेषकर संवाद एवं शोध-आधारित नीति निर्माण की अनिवार्यता पर बल देते हुए। यह संगोष्ठी शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करने में सफल रही, जहाँ सतत विकास, स्थानीय संसाधनों के दोहन तथा क्षेत्रीय आर्थिक समावेशन जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श संपन्न हुआ।



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