किसानों के लिए वरदान बनी "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" माइक्रो इरिगेशन योजना।

जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से किसानों को सिंचाई की सुविधा विकसित करने के लिए "पर ड्रॉप मोर क्राप"माइक्रो इरिगेशन योजना में 80 से 90% अनुदान पर ड्रिप सिस्टम,मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम, पोर्टेबल स्प्रिंकलर सिस्टम और रेन गन की स्थापना करने का निर्देश प्रदान किया गया है। जनपद मऊ में इस वर्ष 1494 हेक्टेयर में उक्त कार्यक्रमों को करने हेतु 9 करोड़ रुपए की कार्य योजना उपलब्ध कराई गई है।

#maunews इस योजना की विशेषता यह है कि ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई से किसान अपने पानी की बर्बादी को रोकेंगे, सिंचाई में कम समय लगेगा तथा मानव श्रम की बचत के साथ किसानों की खेती का आर्थिक बोझ भी काफी कम हो जाएगा। शासन से निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति हेतु विभिन्न कंपनियां नामित कर दी गई है तथा उद्यान विभाग के यू पी यम आई पी पोर्टल पर पंजीकरण प्रारंभ कर दिया गया है ।जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त बताते हैं कि अभी तक जनपद में 80 हेक्टेयर क्षेत्रफल हेतु किसानों ने अपना पंजीकरण कर लिया है जिसके उपरांत कंपनी और किसानों के साथ जिला उद्यान अधिकारी के अनुबंध के पश्चात सिस्टम स्थापना का कार्य प्रगति पर है। जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार विगत वर्ष में 269 हेक्टेयर में किसानों के खेतों पर ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई की पद्धतियां लगभग ढाई करोड रुपए की अनुदान सहायता देते हुए स्थापित कराया गया है तथा विगत वर्ष लगभग 230 किसानों के यह कार्यक्रम उद्यान की फसलों के साथ-साथ गन्ना एवं कृषि फसलों में भी कराए जा चुके हैं जिला उद्यान अधिकारी के अनुसार उदाहरण स्वरूप परदहा विकासखंड के ग्राम इमलिया में खरबूज की खेती करने वाले किसान अमित पांडे के यहां ड्रिप की स्थापना एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में कराई गई थी जिससे उनके खेत में 3:30 किलोग्राम तक का खरबूज प्राप्त हुआ और लगभग तीन लाख की आय प्राप्त की गई। इस सिंचाई पद्धति की खूबी यह भी है कि इसमें उर्वरकों का प्रयोग भी सिंचाई पद्धति के सिस्टम से ही होता है जिससे उर्वरक सीधे पौधों की जड़ के पास और पत्तियों पर पडते हैं जिससे शत प्रतिशत उर्वरक की उपयोगिता सिद्ध होती है और रसायन मुक्त, उर्वरक मुक्त खेती किसान कर पाते हैं। उद्यान निरीक्षक और योजना प्रभारी अरुण कुमार यादव के अनुसार इस वर्ष ज्यादा लक्ष्य प्राप्त होने से किसान अभी से अपना पंजीकरण करा सकते हैं तथा आगामी खरीफ मौसम की सभी सब्जियां, केला बागवानी फसलों, मक्का तथा आगे गेहूं और दलहन, तिलहन में भी स्प्रिंकलर सिंचाई की विधियों का प्रयोग करते हुए योजना से लाभ उठा सकते हैं। किसानों को पंजीकरण हेतु अपने खेत की खतौनी की फोटोकॉपी,आधार कार्ड, बैंक पासबुक की फोटो कॉपी, एक फोटो और एक मोबाइल नंबर जिला उद्यान कार्यालय विकास भवन में उपलब्ध कराना होगा अथवा स्वयं से भी संबंधित पोर्टल पर अपना आवेदन किया जा सकता है। किसानों के लिए एक अच्छा अवसर सरकार की योजना के रूप में प्राप्त हुआ है जिससे किसान एक स्थाई विकल्प के रूप में सिंचाई तंत्र को मजबूत बनाते हुए अपने लागत में काफी कमी और उत्पादन में 25 से 30% तक की वृद्धि ले सकते हैं।इसमें लघु सीमांत किसानों को लागत का 90% तथा बड़े किसानों को 80% तक का अनुदान दिया जाता है। कृषक को मात्र कृषक अंश के रूप में 10 से 20% ही धनराशि जमा की जाती है, इसके उपरांत चयनित कंपनी द्वारा किसान के यहां ड्रिप सिंचाई, मिनी स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति की स्थापना कराकर उसकी संतुष्टि उपरांत बिल पोर्टल पर उपलब्ध कराने के पश्चात सीधे उद्यान विभाग के लखनऊ हेड क्वार्टर से अनुदान की राशि कंपनी के खाते में दी जा रही है।



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