आरजीयू के रिश्वतखोर-भ्रष्ट वीसी साकेत कुशवाहा की केंद्र सरकार द्वारा बर्खास्तगी में अनदेखी

फिजी विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ0 विश्व नाथ मौर्य सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे

गौरतलब है कि हाल ही में राजीव गांधी विश्वविद्यालय ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) के भिन्न-भिन्न विभागों में प्रोफेसर के रिक्त पदों की नियुक्ति में भ्रष्ट कुलपति साकेत कुशवाहा (Currupt VC Saket Kushwaha) का सीमांत भ्रस्टाचार, रिश्वतखोरी और धांधली में लिप्त पाए जाने के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा होने से उसकी बहुत किरकिरी हो रही है। किंतु बेशर्मी और अनैतिकता की हदें पार करने वाले रिश्वतखोर - भ्रस्ट वीसी साकेत कुशवाहा के खिलाफ शासन - प्रशासन की ओर से अभी तक न ही उसकी बर्खास्तगी की गयी और न ही उसके खिलाफ कोई अन्य शक्त कानूनी कार्रवाई की गयी। यहाँ तक कि उसके खिलाफ निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन भी नहीं किया गया। बता दें कि फिजी विश्वविद्यालय (फिजी) समेत कई अन्य प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डीन, डायरेक्टर रह चुके लखनऊ (उप्र) के निवासी प्रोफेसर डॉ0 विश्व नाथ मौर्य ने प्रोफेसर के अभ्यर्थी के रूप में आरजीयू के भ्रस्ट कुलपति साकेत कुशवाहा के रिश्वतखोरी, धांधली और तानाशाही का पर्दाफाश किया है जिसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और प्रिंट मीडिया के भिन्न-भिन्न समाचार पत्रों में कई बार प्रकाशित किया गया है। इस क्रम में उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी संघी दलाल होने के कारण साकेत कुशवाहा (Saket Kushwaha) भाजपा समर्थित नीतीश सरकार में बिहार के मिथिला विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था जहाँ उसके भ्रष्टाचार, धांधली, तानाशाही और गलत बयानबाजी के खिलाफ सन् 2016 - 17 के दौरान हजारों छात्रों और कर्मचारियों के संगठनों ने उसका जगह - जगह पर कई बार पुतला फूंक कर रोषपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया था। परंतु हैरत की बात है कि भ्रष्टाचारी तानाशाह वीसी साकेत कुशवाहा अपने गिरोह के पालतू गुंडों और गुर्गों की मदद से अपने खिलाफ प्रदर्शनकारियों के प्रबल विरोध को दबाने में कामयाब रहा। इतना ही नहीं अपितु उसने अपने रसूख के बल पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धांधली से सम्बंधित अनियमितताओं और विसंगतियों से जुड़े वास्तविक तथ्यों को छिपाते हुए सर्वश्रेष्ठ कुलपति होने की झूठी वाहवाही भी हासिल कर लिया। इसे हास्यास्पद ठहराते हुए प्रोफेसर डॉ. विश्व नाथ मौर्य (Professor Dr. Vishwa Nath Maurya) ने घोर आपत्ति जतात्ते हुए बहुत बड़ा सवाल खड़ा किया है कि जिस भ्रष्ट कुलपति साकेत कुशवाहा (Saket Kushwaha) का पहले से ही हजारों छात्रों और कर्मचारियों के संगठनों के द्वारा जगह - जगह कई बार पुतला फूँक कर रोषपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया हो और उसको उसके पद से छोड़ने अथवा हटाए जाने की पुरजोर मांग की गयी हो, उसी भ्रस्ट वीसी साकेत कुशवाहा को ही 100 कुलपतियों में सर्वश्रेष्ठ कैसे ठहराया जा सकता है? राजीव गांधी विश्वविद्यालय ईटानगर के ऎसे भ्रष्ट वीसी साकेत कुशवाहा (Currupt VC Saket Kushwaha) को तो वर्तमान दशक के कुलपतियों में सबसे भ्रष्ट वीसी होने का प्रमाणपत्र मिलना चाहिए। उन्होने कहा कि इसके पीछे अवश्य ही दाल में कुछ काला है।

देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में सीमांत भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धांधली को लेकर फिजी विश्वविद्यालय (फिजी) के गणित एवं सांख्यिकी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ0 विश्व नाथ मौर्य ने गम्भीर चिंता जताया है। उन्होने कहा कि प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट प्रोफेसर के नियुक्तियों में व्यावहारिक तौर पर निष्पक्षता एवं पारदर्शिता का नितांत अभाव होने के कारण रिश्वतखोरी और धांधली चर्म सीमा पर पहुँच गया है। विश्वविद्यालयों के रिक्त पदों की नियुक्तियों में तीब्रगति से बढ़ते भ्रष्टाचार को देखते हुए प्रो. मौर्य ने अवगत कराया है कि किसी व्यक्ति के शैक्षिक योग्यता, गुणवत्ता और अनुभव के आधार पर कुलपति या प्रोफेसर की नियुक्ति नहीं होती है बल्कि ऎसे किसी भी पद की नियुक्ति के लिए बंद कमरे में कई लाख - करोड़ रुपये की रिश्वत भी देनी पड़ती है जो उच्च शिक्षा क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टतंत्र को दर्शाता है। तीब्रगति से बढ़ते भ्रष्टाचार के दौर में ऎसे कई मामले प्रकाश में आए हैं जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा किए गए भ्रष्टाचार और धांधली के बावजूद भी शासन की विसंगतियों के चलते उसकी नियुक्ति पुनः कुलपति के रूप में या फिर पदोन्नति कर दिया गया है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बहुत बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं बल्कि कलंकयुक्त ही है। बता दें कि भ्रष्ट वीसी साकेत कुशवाहा का मिसाल ऎसे ही कलंकित कुलपतियों मे से एक है जिसके बर्खास्तगी को लेकर केन्द्र सरकार द्वारा अनदेखी की जा रही है। हाल ही में गणित एवं सांख्यिकी के प्रोफेसर डॉ0 विश्व नाथ मौर्य (Dr. Vishwa Nath Maurya) ने राजीव गांधी विश्वविद्यालय, ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) के भ्रष्ट कुलपति साकेत कुशवाहा (Currupt VC Saket Kushwaha) के भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धांधली का पर्दाफाश किया है जिस भ्रष्ट कुलपति का इसके पहले भी सन् 2016-17 में जगह - जगह कई बार पुतला फूँक कर मिथिला विश्वविद्यालय (बिहार) के हजारों छात्रों और कर्मचारियों के अलग-अलग संगठनों ने रोषपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया था। यह जानकर हैरानी होगी कि बिहार में भाजपा समर्थित नीतीश सरकार में मिथिला विश्वविद्यालय के भ्रष्ट कुलपति रह चुके साकेत कुशवाहा (Saket Kushwaha) का उसके भ्रष्टाचार, धांधली, रिश्वतखोरी और तानाशाही के खिलाफ विश्वविद्यालय के हजारों छात्र एवं कर्मचारी संगठनों ने अपने हड़ताल और आंदोलनों में जगह - जगह कई बार उसका पुतला फूँककर रोषपूर्ण पुरजोर विरोध प्रदर्शन किया था। फिर भी शासन - प्रशासन की ओर से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में लिप्त तानाशाह साकेत कुशवाहा (Saket Kushwaha) के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जब विरोध प्रदर्शनकारियों में शामिल हजारों छात्रों और कर्मचारियों ने भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धांधली में लिप्त साकेत कुशवाहा के खिलाफ ज़ोर शोर से हंगामा करते हुए शासन - प्रशासन के द्वारा उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न किए जाने पर सवाल उठाया तो पता चला कि साकेत कुशवाहा संघ का दलाल होने के कारण भाजपा की सरकार में उसकी ऊँची पहुँच है। अतएव, मिथिला विश्वविद्यालय में उसने अपने कार्यकाल के दौरान अपने विरोध में प्रदर्शनकारियों में शामिल हजारों छात्रों और कर्मचारियों के आवाज को दबाने के लिए भी अपने गिरोह के पालतू गुंडों-गुर्गों की मदद लिया था जिसका खुलासा प्रदर्शनकारी छात्रों और कर्मचारियों ने समाचार पत्रों में किया था। और, इतना ही नहीं अपितु उसने अपने शातिराना और चाटुकारिता के चलते भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में भी शासन- सत्ता का नाजायज लाभ उठाते हुए अभी हाल ही में अपनी सगी बहन निर्मला एस. मौर्य (Nirmala S. Maurya) को भी पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर का कुलपति बनवाने में कामयाबी हासिल कर लिया। और, सीधी - साधी अबोध जनता के बीच झूठी वाहवाही पाने और उन्हें मुर्ख बनाने के लिए आये दिन अपनी बहन निर्मला एस. मौर्य के नाम के साथ समाचार पत्रों में फिजूल की सफलता के लेख छपवाता रहता है जिससे भोली-भाली जनता दिग्भ्रमित होकर उस भ्रष्टाचारी व्यक्ति को बुरी निगाह से न देख सके और उल्टे उसको सस्ती लोकप्रियता मिल सके जिससे वह जनता और सरकार की आंखों में धूल झोंककर और ज्यादा तरक्की पर पहुँच सके। जबकि सच्चाई तो इससे बिल्कुल भिन्न है, उसके खाने और दिखाने के दाँत अलग-अलग हैं और उसने भ्रष्टाचार, धांधली, रिश्वतखोरी और धूर्तता में महारत हासिल कर लिया है।

उक्त क्रम में उल्लेखनीय है कि यूजीसी के फर्स्ट कैटेगरी एवं NAAC A++ ग्रेड की सूची वाले के.एल. विश्वविद्यालय (आंध्रप्रदेश), सिंहानिया विश्वविद्यालय राजस्थान, एवं फिजी विश्वविद्यालय (फिजी) एवं अन्य कुछेक तकनीकी संस्थानों में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डीन, डायरेक्टर, परीक्षा नियंत्रक, प्रधान परीक्षक रह चुके शिक्षाविद् प्रोफेसर डॉ0 विश्व नाथ मौर्य (Dr. Vishwa Nath Maurya) ने गम्भीर चिंता जताया है कि भाजपा सरकार में साकेत कुशवाहा (Saket Kushwaha) जैसे भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोर, धांधलेबाज कुलपति के खिलाफ कोई कार्रवाई न किया जाना शिक्षा क्षेत्र में भ्रष्टतंत्र को बढ़ावा देना है। प्रो. मौर्य ने घोर आपत्ति जताया है कि साकेत कुशवाहा जैसे भ्रष्टाचारी, तानाशाह, अपवादित और कलंकित कुलपति को इसके पहले ही जेल में होना चाहिए था किन्तु विडम्बनापूर्ण है कि भाजपा सरकार की विसंगतियों के चलते ऎसे संघी दलाल साकेत कुशवाहा (Saket Kushwaha) को पुनः सन् 2018 में राजीव गांधी विश्वविद्यालय ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) का कुलपति नियुक्त कर भ्रष्टाचार को बढ़ाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने राजीव गांधी विश्वविद्यालय ईटानगर के वर्तमान भ्रस्ट कुलपति साकेत कुशवाहा (Currupt VC Saket Kushwaha) पर आरोप लगाया है कि उसने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के मानकों को ताख पर रखते हुए प्रोफेसर डॉ0 विश्व नाथ मौर्य से रिश्वत के रूप में मोटी रकम न पाने के कारण ईर्ष्या, द्वेष और प्रतिषपर्धा की गलत मंशा के साथ मनमाने ढंग से शून्य एपीआई स्कोर (Zero API Score) देकर प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए अयोग्य ठहराया है जो सुप्रीम कोर्ट में चुनौतीपूर्ण है।

डॉ. विश्व नाथ मौर्य ने साक्ष्यों के साथ अवगत कराया कि देश के पचासों प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों से उन्हें उनके पर्याप्त शैक्षिक योग्यता, गुणवत्ता और अनुभव को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें न केवल प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डीन, डायरेक्टर, रजिस्ट्रार और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी एवं कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति हेतु साक्षात्कार के लिए बुलाया गया अपितु वह देश - विदेश के कई विश्वविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थाओं में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डीन, डायरेक्टर और परीक्षा नियंत्रक भी रह चुके हैं और उन्होने उच्च शिक्षा क्षेत्र में 20 वर्ष से अधिक सेवा भी किया है। मई 2015 में डॉ. विश्व नाथ मौर्य का कॉपरस्टोन विश्वविद्यालय, किटवे, जाम्बिया जाम्बिया (साउथ अफ्रीका) में भी साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफ़ेसर और डीन की नियुक्ति हुई थी किंतु प्रो. मौर्य ने अपने पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वहाँ जाकर पदभार ही नहीं ग्रहण किया। ऎसे में गम्भीर प्रश्न उठता है कि जो व्यक्ति पहले से अपनी पर्याप्त योग्यता, गुणवत्ता, अनुभव और विश्व के अनेकानेक पीर रेव्यूड जर्नल (peer reviewed journal) में सैकड़ों प्रकाशित शोधपत्रों के आधार पर देश - विदेश के विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहकर भारत गौरव, राष्ट्रीय शिक्षा रत्न और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम एक्सीलेंस अवार्ड समेत दर्जनों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया हो, उसे किसी विश्वविद्यालय का कोई वीसी जीरो एपीआई स्कोर देकर कैसे अयोग्य ठहरा सकता है?

उल्लेखनीय है कि शिक्षा जगत में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रोफेसर डॉ0 विश्व नाथ मौर्य (Dr. Vishwa Nath Maurya) के विधिमान्य साक्ष्यों एवं गम्भीर तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धांधली में फंसे आरजीयू के भ्रष्ट वीसी साकेत कुशवाहा (Saket Kushwaha) के समर्थन में कोई व्यक्ति या अधिकारी आवाज उठाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। उन्होने उसके भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और धांधली को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि साकेत कुशवाहा का बाप सुरेन्द्र कुशवाहा (Surendra Singh Kushwaha) भी यूजीसी के मानकों को दरकिनार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में प्रो. विश्व नाथ मौर्य का एपीआई स्कोर शून्य ठहराते हुए अयोग्य नहीं सिद्ध कर सकता है जो बीएचयू बनारस से सेवानिवृत्त हो चुका है।

यूजीसी के मानकों को दरकिनार करके भ्रष्ट वीसी साकेत कुशवाहा को रिश्वत न मिलने पर गणित एवं सांख्यिकी के प्रोफेसर नियुक्ति के लिए उसके द्वारा मनमाने ढंग से जीरो एपीआई स्कोर देकर अयोग्य ठहराने पर प्रोफेसर डॉ0 विश्व नाथ मौर्य ने घोर आपत्ति व्यक्त करते हुए अभी हाल ही में केंद्र सरकार से मांग किया है कि विवादित प्रकरण की गंभीरता और संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए केंद्र सरकार को जनहित में राजीव गांधी विश्वविद्यालय, ईटानगर (अरुणाचल प्रदेश) के ऎसे भ्रष्ट, तानाशाह और कलंकित वीसी साकेत कुशवाहा को उसके पद से तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए किन्तु अभी तक शासन - प्रशासन की ओर से उसके बर्खास्तगी को लेकर कोई कार्यवाही नहीं की गई। अतएव, प्रो. मौर्य ने आपत्ति दर्ज कराते हुए केंद्र सरकार से पुनः गुहार लगाया है कि उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए और भ्रष्ट वीसी साकेत कुशवाहा को भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, धांधली और उसके पद के दुरुपयोग किए जाने के खिलाफ ठोस कार्यवाही के रूप में उसकी अविलम्ब बर्खास्तगी करके जेल भेजने का निर्णय लिया जाना चाहिए। उन्होने कहा है कि यदि उनके द्वारा गम्भीर आरोपों और शिकायतों के बावजूद भी उनके न्यायहित में केंद्र सरकार आरजीयू ईटानगर के भ्रष्ट कुलपति साकेत कुशवाहा के खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं करती है तो विवशता में दूसरे विकल्प के तौर पर प्रो. मौर्य उचित न्याय पाने और उसके बर्खास्तगी (termination) की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।



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