असम के मुख्यमंत्री को हिंसा फैलाने की छूट दे रहे हैं गुवाहाटी हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश- शाहनवाज़ आलम*

नयी दिल्ली, 28 जनवरी 2026. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार का मुख्यमंत्री के साम्प्रदायिक और संविधान विरोधी भाषा पर अनुच्छेद 226 के तहत स्वतः संज्ञान न लेने को आपराधिक अनभिज्ञता बताया है.
शाहनवाज़ आलम ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि असम के मुख्यमंत्री संविधान के पालन हेतु लिए गए अपने शपथ के साथ विश्वासघात नहीं कर सकते. उनका यह कहना कि ‘उनका काम है मुसलमानों को प्रताड़ित करना’ उन्हें स्वतः ही पद के अयोग्य कर देता है. क्योंकि सरकार का काम किसी को प्रताड़ित करना नहीं हो सकता. ऐसे में संविधान की अभिरक्षक होने की ज़िम्मेदारी के तहत मुख्य न्यायाधीश को मुख्यमंत्री के नाम नोटिस भेजना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट जिसके पास कुल 24 जजों की मजबूत संख्या है, ने तय कर लिया है कि वो मुख्यमंत्री की संविधान विरोधी भाषा पर आँख, कान और मुँह बंद रखेंगे और अनुच्छेद 226 के तहत मिले स्वतः संज्ञान लेने के अधिकार का इस्तेमाल नहीं करेंगे और असम को दूसरा मणिपुर बनाकर साम्प्रदायिक आग में झोंक देंगे.
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह नहीं भूला जा सकता कि मणिपुर को भी उसके हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमवी मुरलीधरन ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण देने का असंवैधानिक फैसला देकर पूरे मणिपुर में हिंदू मैतेई और ईसाई कुकी समुदायों के बीच नफ़रत को बढ़ावा देकर कुकी विरोधी जनसंहार का माहौल निर्मित किया था. जिसके बाद राज्य मशीनरी और आरएसएस से जुड़े अपराधी तत्वों ने पाम आयल से जुड़े रामदेव, अदानी और गोदरेज के हितों के लिए कुकी समुदाय का जनसंहार किया था.
उन्होंने कहा कि असम में जिस तरह मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा लगातार मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत और हिंसा फैलानेवाले भाषण दे रहे हैं और उसपर जिस तरह हाईकोर्ट स्वतः संज्ञान नहीं ले रहा वो मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश के बीच के आपराधिक और षड्यंत्रकारी गठजोड़ को उजागर करता है. इसलिए असम में होने वाली किसी भी मुस्लिम विरोधी हिंसा के दोषी मुख्यमंत्री के साथ ही मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार भी माने जाएँगे.



